
मानव सेवा ही भगवान की सेवा है : गोस्वामी दिव्येश कुमार महाराज

दस दिव्यांगों को भेंट की ट्राइसिकल, बोले- सत्संग के साथ समाज के प्रति दायित्व निभाना ही धर्म का मर्म
खंडवा। धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ, अनुष्ठान और धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है। धर्म का वास्तविक स्वरूप तब सामने आता है, जब व्यक्ति अपने आसपास मौजूद जरूरतमंद, असहाय और पीड़ित लोगों के प्रति संवेदना रखते हुए उनके जीवन में सहयोग का माध्यम बनता है। मानव सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा है। सत्संग के साथ समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करना ही धर्म का मर्म है। यह बात गोस्वामी दिव्येश कुमार महाराज ने रामनारायण माहेश्वरी फाउंडेशन एवं लखन आनंद समूह द्वारा आयोजित स्मृति समारोह में व्यास गादी से संबोधित करते हुए कही।
संतों के सान्निध्य से जागता है सेवा का भाव
प्रवचन में महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य भगवान तक पहुंचने के लिए अनेक मार्ग अपना सकता है। कोई पूजा-पाठ करता है, कोई ध्यान करता है तो कोई भक्ति और सत्संग का मार्ग अपनाता है, लेकिन इन सभी साधनाओं का उद्देश्य मनुष्य के भीतर करुणा और सद्भाव का जागरण होना है। यदि हमारी साधना से हमारे भीतर दूसरों के दुख को समझने की भावना पैदा नहीं होती तो उस साधना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
उन्होंने कहा कि सत्संग केवल कथा सुनने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने जीवन को बदलने की प्रेरणा है। सत्संग में सुने गए विचार तभी सार्थक होते हैं, जब उनका प्रभाव हमारे व्यवहार में दिखाई दे। किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाना, किसी असहाय को सहारा देना और किसी व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने में सहयोग करना भी ईश्वर की आराधना के समान है। समाजसेवी को प्रवक्ता सम्मेलन बताया कि रामनारायण माहेश्वरी फाउंडेशन द्वारा आयोजित स्मृति समारोह कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध संत देवेश कुमार महाराज बुधवार को खंडवा पढ़ा देते एवं शाम को अग्रवाल धर्मशाला में दिव्यांग जरूरतमंदों को ट्राईसाईकिल भेंट कार्यक्रम में शामिल होकर धर्म सभा को संबोधित किया। अपने प्रवचन में गोस्वामी दिव्येश कुमार महाराज ने कहा कि प्रभु को पाने के लिए मनुष्य बाहर बहुत कुछ खोजता है, जबकि धर्म का पहला चरण स्वयं को जानना है। व्यक्ति जब अपने भीतर झांकता है तो उसे अपने कर्तव्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारियों का बोध होता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की अनुभूति केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि सेवा और सद्भाव के कार्यों में भी की जा सकती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि अपने सामर्थ्य के अनुसार नियमित रूप से सेवा कार्यों से जुड़ें। सेवा के लिए धन ही जरूरी नहीं है। किसी जरूरतमंद को समय देना, उसकी समस्या सुनना, उसके साथ खड़ा होना और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना भी सेवा है।
दस दिव्यांगों को भेंट की ट्राइसिकल
समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि समारोह के दौरान महाराज श्री की प्रेरणा से दस दिव्यांग भाई-बहनों को लखन आनंद समूह द्वारा ट्राइसिकल भेंट की गई। ट्राइसिकल मिलने के बाद दिव्यांगों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस सेवा कार्य की सराहना की।
इस अवसर पर समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि धर्म और सेवा का यह संगम समाज के लिए प्रेरणादायी है। दिव्यांगजनों को जरूरत के अनुसार सहयोग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति की जिम्मेदारी है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सेवा कार्यों को बढ़ावा मिलने से समाज में सहयोग और संवेदना की भावना मजबूत होती है।
भक्ति के साथ सेवा का संकल्प
महाराज श्री ने कहा कि आज समाज को केवल उपदेश की नहीं, बल्कि सेवा के संकल्प को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। यदि एक व्यक्ति प्रतिदिन किसी एक जरूरतमंद की सहायता करने का संकल्प ले तो समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि धार्मिक पर्व, कथा और सत्संग को केवल व्यक्तिगत पुण्य तक सीमित न रखें, बल्कि इन्हें समाज सेवा से जोड़ें।
उन्होंने कहा कि जिस सेवा में स्वार्थ न हो, वही सच्ची सेवा है। सेवा करते समय यह भाव नहीं होना चाहिए कि हम किसी पर उपकार कर रहे हैं। बल्कि यह समझना चाहिए कि ईश्वर ने हमें किसी जरूरतमंद की सहायता करने का अवसर दिया है। यही भाव मनुष्य को भीतर से समृद्ध बनाता है।
महाराज श्री का किया स्वागत
कार्यक्रम में महाराज श्री का स्वागत लखन लाल नागौरी, आनंद, संतोष नागौरी, घनश्याम शाह एवं अरुण बाहेती ने किया। अतिथियों का स्वागत नागौरी परिवार की ओर से किया गया। आज के साथ आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा आनंद नागौरी ने प्रस्तुत की।
प्रवचन के बाद हिंडोला दर्शन और महाप्रसादी
कार्यक्रम में तनुजा शाह ने गोस्वामी दिव्येश कुमार महाराज का परिचय दिया। प्रवचन के पश्चात हिंडोला दर्शन एवं महाप्रसादी का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आयोजन में सहभागिता कर महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन गोविंद शर्मा ने किया, जबकि आभातर आयुष नागौरी ने व्यक्त किया। सेवा कार्य और महाराज श्री के प्रवचन से प्रेरित श्रद्धालुओं ने मानव सेवा को जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।










